मंगलवार, 10 मई 2016
रविवार, 8 मई 2016
मंगलवार, 8 दिसंबर 2015
मेरे बारे में चंद शब्दों में
- नाम - शब्बीर कुमार चौरसिया
- जन्म - 08 जनवरी 1985
- पिता - सावंत राम चौरसिया
- स्थान - बालको नगर , कोरबा छत्तीसगढ़ , इंडिया
- योग्यता - B.com, M.A. (Economic), M.A. (Sociology), Computer PGDCA,
- व्यवसाय - स्वयं का कंप्यूटर डाटा वर्क बिजनेस .
- शौख (Hobby) - चित्रकारी, लेखन, कविता, शायरी,
- पुरस्कार - चित्रकारी में विभिन्न प्रमाण पात्र .
दोस्तों
मैं बचपन से हड्डियो में कमजोर होने से विकलांग हूँ. जिसकी वजह से मैं
बचपन से २४ साल तक शारीरिक दुःख झेला है .और इसी हालत में भी मैं जीवन का
संघर्ष करते अपनी शैक्षणिक योग्यता को पूरा किया . मैं अपने को कभी कमजोर
नहीं समझा मैं हमेसा अपने को आम इंसानों की तरह देख है. मुझे हमदर्दी पसंद
नहीं. न मैं किसी से मदद लेना चाहता हूँ. इसलिए मैं अपनी बाकी का जीवन अपने
पैसो से जी सकू इसलिए मैं एक नौकरी की तलाश में हूँ. पर अब तक मुझे अपनी
मंजिल नहीं मिला है .परन्तु मैं नौकरी के भरोसे नहीं हूँ .मैं अपने घर पर
ही 2013से कंप्यूटर डाटा वर्क के जरिये अपना पैसा कमा कर अपना स्याम का
खर्च मैं निकल लेता हूँ.
मैं अपना खाली समय नेट में कुछ सर्च कर के या किताब पढ़ के निकलता हूँ. न्यूज़ पढना मुझे बहोत पसंद है .मुझे अकेले रहना बहोत पसंद है .खास कर एकांत में .और कही घुमने का मन हो तो बस नदी पर्वत या जंगल में जाने का मन होता है .
दोस्तों
मैं बहुत खुले विचार का इन्सान हूँ . जो दिल में होता है मैं बोल देता
हूँ. किसी से मुझे शिकायत होने पर भी मैं उनको कुछ दिनों के बाद माफ़ भी कर
देता हूँ. अध्यात्मिक नजर से मैं नास्तिक का जीवन जीता हूँ. क्योकि मैं
अध्यात्म के वजह से बहोत बेवकूफी किया है .इसलिए अब धर्म और इश्वर से मेरा
दिल उभ चूका है. मैं रुनिवादी और अन्धविश्वास से नफरत करता हूँ. साथ में
धर्म के नाम पर कट्टरता को मैं घृणा के नजर से देखता हूँ.
यदि
मेरे हाथ में पैसा हो तो मुझे उसे खर्च करने का मन होता है. पर उसी चीज
में जिसमे मुझे ज्यादा खुसी हो. खाने पिने का मैं सौकीन नहीं ,मुझे
इलेक्ट्रोनिक चीजे खरीदने का बड़ा सौकीन हूँ. इसलिए मैं अपना पैसा अपने लिए
खर्च करता हूँ. धन का संचय भी करता हूँ पर उतना भी नहीं की मेरी खुसी के
बिच दिवार बने .
मुझे
नए लोगो से मिलना बहोत पसंद है .और उनसे बाते करना . लडकियो से भी दोस्ती
करना पसंद है . और मेरा दिल में जो फिलिंग होता है मैं कह देता हूँ. मुझे
अपने इज्जत और मान-सम्मान को लेकर कोई डर नहीं .मुझे जो अच्छा लगे वही करता
हूँ. पाप पुन्य सब मुझे बकवास लगता है .
मेरे
जीवन में कई लड़कियां आई है और प्यार मोहब्बत का खेल चला है. पर मैं 2
लडकियो से प्यार किया . पहली वाली से तो मुझे प्यार में बहुत दुःख मिला ,
पर जब दूसरी आई तो मुझे दुनिया की हर खुसी दी. हाला की मैं उन दोनों के
काबिल नहीं था इसलिए उनसे मेरा सम्बन्ध चंद पल का रहा है .
मेरा
कोई दोस्त है तो मेरा केवल भाई है .जिसे हर बात शेयर किया करता हूँ. आने
वाले समय में ओ चाहे मेरे साथ जैसा करे पर उम्मीद है वही है मेरा ख्याल
रखेगा .
मेरी
माँ दुनिया की सबसेअच्छी माँ है जो मेरी इतना सेवा किया .और पिता जी जो
मेरा हर ख्वाब पूरा किया. और लास्ट में मेरी बहन जो मेरा हर बात मानती है
उसे बहोत प्यार है .बस कहने को मेरे पास बहोत है पर इतना ही कहना चाहूँगा .
--शब्बीर चौरसिया
शनिवार, 7 नवंबर 2015
भविष्य को लेकर चिंता
इन दिनों मुझे अपने भविष्य को लेकर काफी चिंता है। इसका वजह सिर्फ मेरे रोजगार को लेकर है। डिग्रीयाँ होने को तो मेरे पास बहोत है। और अपना खुद का छोटा बिज़नेस से अपनी खर्च और जरुरत की चीजे मैं स्वयं पूरा कर लेता हूँ। पर इन्ही चीजो से आनेवाला भविष्य के लंबी सफ़र को जीया नही जा सकता। माना की मेरे भाई के पास अच्छी नौकरी भी है और जाहिर है उनके रहते मुझे क्या गम, फिर भी मैं खुद्दार की जिन्दगीं जीना चाहता हूँ ।किसी के भरोसे नही रहना चाहता। पर न जाने कब मुझे मेरी मंजिल मिलेगा। जॉब के लिए इतने आवेदन और exam दिला-दिला के भी थक चूका हूँ। पर कोई राह नही मिल रहा। हाला की जॉब ही सबकुछ नही होता और भी रास्ते हैं income के। पर समझ नहीं आता की ऐसा क्या बिज़नेस करू जो मेरे भविष्य को सुरक्षित बना सके।
शुक्रवार, 29 मई 2015
मेरे ब्लॉग का पहला लेख
दोस्तों सबसे पहले मेरे ब्लॉग परमैं शब्बीर चौरसिया आपका तहे दिल से स्वागत करता हूँ. की आप लोग मेरे जीवन के बारे मे जानने की इच्छा रखते है और इसे पढ़ने को अपना बहुमूल्य समय दे रहे हैं.दोस्तों मेरे जीवन यू तो बहुत ही दुःख भरा है फिर भी ईश्वर येशु ने मुझे एक साधारण इंसानो से भी बढ़कर सब कुछ दिया है। मैंने अपने जीवन में ओ सब कुछ पाया है जो एक साधारण इंसान सायद पा सकेगा। मेरी हालात तो आप जब मुझे मिलेंगे तो ही जान पाएंगे की कैसा हूँ। मैं अपने को कुछ भी नहीं समझता पर खुदा ने मुझे सभी लागो की तरह हर ख़ुशी दिया है। आज मैं जैसा भी हूँ अपने आप से खुश हूँ। और इस मुकाम तक पहुँच चूका हूँ की आज मैं आप लोगो से अपनी बाते शेयर करने को लिख रहा हूँ। मेरा शैक्षणिक शिक्षा B.com, MA Economic, MA Sociology, Computer PGDCA की है। बस एक नौकरी की कमी है फिर भी मैं अपने स्वयं के कामो से इतना पैसा कमा लेता हूँ की अपनी खर्च मैं खुद उठा सकता हूँ। दोस्तों मेरे जीवन में और भी बहुत से बाते है जिसे आप लोगो तक पहुचाने को यह ब्लॉग तैयार किया हूँ। कृपया मेरे लेख जरूर पढ़ते रहना।
धन्यवाद
--शब्बीर चौरसिया
शुक्रवार, 25 मई 2012
इंतिजार है मुझे
न जाने जिंदगी कहाँ ले कर जाएगी !
जाने कब मंजिल करीब आएगी !!
जाने कब मंजिल करीब आएगी !!
भटकता रहा हूँ मैं इस जीवन के उद्देश्य को समझने में !
क्यों जन्म हुआ है मेरा ये तो वक्त ही बताएगी !!
कहते हैं जीवन एक पहिये की तरह है ,जो की निरंतर चलती रहती है .जब तक की मंजिल को पा न ले .पर न जाने क्यों मुझे पिछले कुछ सालो से ऐसा लग रहा है, की मेरी जीवन की कहानी मानो रुक सी गई है .जमाना कहा से कहा पहुँच रहा हैं और मैं अभी भी चार दीवारी में फंसा हुआ हूँ .मैं पिछले कई सालो से अंतरात्मा के बोझ से दबा हुआ हूँ मुझे अपनी जीवन की मंजिल नजर नहीं आती .मेरे जीवन में तो बचपन से ही दुखो का सिलसिला है पर बीते हुए वर्षों से मुझे कुछ ज्यादा ही आत्मिक दर्द मिल रहा है .पर फिर भी मैं अपने को टूटने नहीं दे रहा हूँ .जिंदगी को देख रहा हूँ की और कितना गम देगी . मैं भी देखना चाहता हूँ की कितने गम सहने की मुझमे सामर्थ है .पर उम्मीद करता हूँ मेरे भी जीवन में कोई तो जरुर उद्देश्य होगा जिनके लिए मैं जन्मा हूँ .और उसी की इंतिजार है मुझे .
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