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गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

पार्षद चुनाव का अनुभव

साल 2019 की बात है जब विधानसभा चुनाव 2018 के बाद नगरीय निकाय 2019 का चुनाव होने वाला था। मुझे सुरू से पर्षद चुनाव लडने का मन था। इसके लिए मैंने कांग्रेस पार्टी में जुड़ा और पार्टी नेताओं से संपर्क करते रहा। और इसके तयारी के लिए पूरी जानकारी एकत्र करने लगा। मैं अपने वार्ड से चुनाव लडना चाहता था पर अपने वार्ड में आए हुए मुझे एक वर्ष  ही हुआ था। यहां के लिए मैं एक नया व्यक्ति था। लेकिन मैने अपने चॉइस सेंटर के कार्यों के जरिए काफी लोग पहले से पहचान बना चुका था।और अपने क्षेत्र के बालको नगर में भी मुझे प्रायः कई लोग जानते भी थे। मैं एक अपनी पहचान बनाना चाहता था, साथ ही अपने जैसे दिव्यांग लोगो को भी राजनीति में जगह दिलाना और अपने वार्ड के लिए कुछ कर दिखाने का जुनून था।

दिनांक 05.12.2019 को मैंने कांग्रेस पार्टी से पार्षद पद के दावेदारी के लिए नामांकन भरा। परंतु मुझे पार्टी तरफ से समर्थन नहीं मिला। फिर मुझे लगा कि चुनाव नही लड़ना चाहिए। मैंने बहुत सोचा पर मैं अपनी इच्छा पूरी करना चाहता था। इसलिए सोचा की पार्टी से न सही, अब जब चुनाव लड़ने का मन बना लिया है तो फिर हर हाल में पीछे नहीं हटूंगा, चाहे इसका परिणाम जो आए। मैं जानता था अब पार्टी तरफ से समर्थन नही मिला तो मैं अकेला चुनाव नही जीत सकता। और कई लोगो ने मुझे टोका की चुनाव मत लड़ो। फिर भी मैंने निर्दलीय से नामांकन भर दिया।
 
दिनांक 09.12.2019 आज नामांकन वापस लेने का आखरी दिन था लेकिन मैने अपना नाम वापस नही लिया और चुनाव के लिए आगे बढ़ गया। और मुझे निर्दलीय चुनाव चीन "दो पत्ती" छाप मिला। मैंने अपने तरफ से प्रचार के लिए सभी साधन व्यवस्था की। इस काम में मेरी बहन ही मेरा सबसे ज्यादा मदद की। और उनके प्रोत्साहन से मैं इस कदम के लिए आगे बढ़ा। मैं जानता था चुनाव में जीत मुस्कील है इसलिए खर्चा भी उसी के हिसाब से किया। 


दिनांक 12.12.2019 को चुनाव प्रचार के लिए मैं पंपलेट बेनर आदि चीजे बनवाया। और एक गाड़ी में चुनाव प्रचार के लिए गीत बनवा के लौडिस्पीकर से गली-मोहल्ले अपने चुनावी वादे को जन-जन  तक पहुंचाया। एक छोटा रैली भी किया। मैं खुद अपने इलेक्ट्रिक व्हील चेयर से जा कर लोगो के घर घर पंपलेट बाटा और लोगो से आग्रह किया की मुझे वोट करे। जिस हिसाब से सोचा नही था उससे कही अधिक प्रचार हुआ। मेरे प्रचार को देख विरोधी पार्टियां भी सोचने पे मजबूर हो गए थे।


दिनांक 21.12.2019 को आज चुनाव का दिन था मेरे जीवन का सबसे यादगार पल। मेरे राजनीती जीवन का पहला स्टेप जो मैं अपने वार्ड पार्षद के प्रत्यासी के रूप में सभी पार्टी के लोगो के साथ निर्दलीय रूप में खड़ा हुआ और श्री हितानंद अग्रवाल (बीजेपी वर्तमान पार्षद), श्री मो. राशिद जमाल (कांग्रेस पार्षद प्रत्याशी), श्री गोपी राम साहू (बसपा पार्षद प्रत्यासी), श्री अर्जुन साहू (जनता जोगी कांग्रेस) इन सभी का सहयोग मिला।

दिनांक 24.12.2019 आज चुनाव का नतीजा आया जिसमे श्री हितानंद अग्रवाल (बीजेपी) को जीत हासिल हुआ यह दूसरी दफा था जब वह पुनः इसी वार्ड से पार्षद पद पर विजयी हुए। मुझे खास वोट नही मिला लेकिन मुझे कोई दुख नही हुआ क्योंकि मैं पहले से जानता था की आखिर में क्या होगा। फिर भी मैं मैदान में डटे रहा और सभी प्रत्याशियों को सोचने में मजबूर कर दिया था।

इस चुनाव से ये सीखने को मिला की आज के समय में चुनाव और राजनीति सिर्फ पैसे वालो की है। और जनता भी काफी हद तक पैसे के पीछे भागती है। और साथ ही ये जाना की प्रोत्साहन कम लोग देंगे और मनोबल कमजोर करने वाले अधिक मिलेंगे। और यही मेरे साथ हुआ कई लोग टोका टाकी किए। लेकिन दुनिया कुछ कहे करो वही जो आपका दिल चाहे। क्योंकि न कर के जीवन भर पस्ताने से अच्छा कोई काम को कर के पस्तावो।

वैसे इस चुनाव की बहुत सी बाते है जिसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता। इसे यही तक लिखना ठीक रहेगा। लेकिन जिंदा रहा तो मैं अपनी जीवन पर एक किताब लिखूंगा उस में इसका पूरी डिटेल रहेगा। और अगले चुनाव का इंतजार है, में फिर से कोशिश करूंगा और उम्मीद है इस बार जीत जरूर हासिल होगा।
 
---शब्बीर चौरसिया 

रविवार, 20 जनवरी 2019

सुमी नर्सरी स्कूल का प्रथम वार्षिक उत्सव

आज मेरे कॉलोनी स्थित सुमी नर्सरी स्कूल का प्रथम वार्षिक उत्सव था. स्कूल सञ्चालन श्रीमती सुषमा ठाकुर मेम के द्वारा संचालित है. सुषमा मेम स्कूल का सारा कार्य मुझे देती है. और मुझे भी उनके स्कूल का कार्य करना अच्छा लगता है. मेम मुझे अपने स्कूल के प्रथम वार्षिक उत्सव में मुझे खास मेहमान के रूप से आमंत्रण दिया था और मुझे बहुत ही ख़ुशी हुआ. वैसे तो मुझे भीड़-भाड़ जगह में जाना पसंद नहीं लेकिन मेम के द्वारा मुझे बुलाने पर मैं गया. और मुझे वहां बहुत अच्छा लगा. सुषमा मेम मुझे अपने स्कूल कार्यक्रम में बोलने का मौका दिया और साथ ही सभी लोगो को मेरे बारे में बताया और मेरे और मेरे कार्यो के बारे से बहुत प्रसंशा की.

वहां पर मैं आश्चर्य तब हुआ जब मैंने अपने बचपन के कक्षा पहली (Class 1) की इंग्लिश मैडम श्रीमती गिरधर मेम  को देखा और उनसे मिला . मेरा बचपन का सबसे अच्छी शिक्षिका मुझे गिरधर मैडम लगती थी. वह मुझे बहुत प्यार करती थी और सब बच्चो से ज्यादा मुझे ध्यान देती थी. वह मुझे बहुत प्रोत्साहित करती थी .

गिरधर मैडम भी मुझे देख बहुत भाउक हो गयी और सबके सामने मेरे बचपन की बाते सभी को बताई. मेरी खूब तारीफ कर रही थी .सुषमा मेम ने गिरधर मैडम के हाथो से मुझे स्मृति चिन्ह भेट स्वरुप दिलाई. बहुत ही खुशनुमा पल था. मेरे जीवन का यादगार पल. सुक्रिया सुषमा मेम और सुक्रिया गिरधर मेम.


 

शुक्रवार, 18 जनवरी 2019

माननीय जय सिंह अग्रवाल का मंत्री पद प्राप्त करने पर बधाई

 छत्तीसगढ़ २०१८ विधानसभा चुनाव पर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी का सरकार बना , साथ ही हमारे जिले के श्री जय सिंह अग्रवाल को मंत्री पद दिया गया. श्री जय सिंह अग्रवाल को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री) पद मिला. इस अवसर पर हमारे चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स के यूनियन द्वारा एक स्वागत समारोह रखा गया था. जिसमे मैं भी माननीय मंत्री महोदय को बधाई देने पंहुचा था. इस अवसर पर मंत्री जी को शुभकामनाएं दिया और उनको अभिवादन कर बधाई दिया. 

 



शनिवार, 9 जून 2018

विधायक श्री जय सिंह अग्रवाल द्वारा कांग्रेस पार्टी में स्वागत

आज कांग्रेस पार्टी का संकल्प शिविर कार्यक्रम था जिसमे  माननीय जय सिंह अग्रवाल (विधायक कोरबा) द्वारा मुझे कांग्रेस पार्टी में सामिल होने का मौका दिया और आईटी सेल का कार्य सौपने का आश्वासन दिया गया. इस मौके पर कई गणमान्य लोग उपस्थित थे उनमे से श्री राजकिशोर प्रसाद जी, श्री विकास डालमिया, आशीष राव, राकेश पंकज , विकास सिंह आदि लोग उपस्थित थे.




गुरुवार, 26 अप्रैल 2018

कांग्रेस पार्टी में शामिल हुआ

 दिनांक 26-04-18 को वार्ड क्र35 हाउसिंग बोर्ड सामुदायिक भवन मे 5बुथ का मिटीग लिया गया जिसमे अतिथि जिला काग्रेस कमेटी (शहर)जिलाध्यक्ष श्री राजकिशोर प्रसाद जी, पूर्व जिलाध्यक्ष श्री श्याम सुन्दर सोनी जी थे ! इस अवसर पर वरिष्ठ काग्रेसी जमाल खान जी, जिला सचिव एफ. डी. मानिकपुरी जी, विकास डालमिया जी, micमेम्बर देवी दयाल सोनी जी, नगर अध्यक्ष दुष्यंत शमां जी, उस्मान खान जी, ए. डी. जोशी जी, मुन्ना खान जी, सुखी राम जागडे जी, के. पी. सोनी जी, आर. के. नामदेव जी,श्रीकांत माझी जी,  सी. एल. देवागन जी, आशीष राव जी, मिथलेस चन्द्रा जी, आंसारी जी, आनंद  दादा जी,  पारितोष सिंह जी, नूर आबूदिन जी, के. के. चौकसे जी, राकेश पंकज जी, पीयूष पाण्डेय जी, रवि सोनवाने जी, लीलाशु वमां जी, गया प्रसाद जी, दुगेश सोनवाने जी, भावानी साहू जी, जनक नायक जी, डी. के. राय जी, बिटटु सिहं जी, शब्बीर जी, एंव बुथ के पदाधिकारी , महिलाएं , वार्ड वासी भारी संख्या मे उपस्थित थे।

साथ ही मुझे इस अवसर पर नये कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में  जिला काग्रेस कमेटी (शहर)जिलाध्यक्ष श्री राजकिशोर प्रसाद जी, एवं पूर्व जिलाध्यक्ष श्री श्याम सुन्दर सोनी जी द्वारा स्वागत किया गया।

 







बुधवार, 28 फ़रवरी 2018

इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर से मिले मुझे दो पैर

आज मैं मैने अपने पैसे से इलेक्ट्रिक व्हील चेयर (Electronic Wheelchair) खरीदा, मेरा बहुत दिन से सपना था की इस व्हील चेयर को मैं खरीदू , पर इसकी कीमत अधिक होने से आज तक नही ले सका था। क्योंकि पहले यह व्हीलचेयर भारत में कम बनता था जिससे इसकी कीमत एक लाख से अधिक होता था। लेकिन अब यह भारत में भी मिलने से इसकी कीमत में थोड़ी कमी आई जिसके कारण मैं इसे खरीद सका। इस व्हीलचेयर को मैंने 55000 ₹ में अहमदाबाद गुजरात से ऑनलाइन खरीद कर मंगाया था।  

इसे पाकर मुझे ऐसा लगा मानो मुझे दो पैर मिल गए हो, मतलब मुझे ऐसा लगा कि मैं भी आम इंसानों की तरह चल फिर सकता हूं। अब मैं किसी के भरोसे नहीं, पहले मुझे इधर उधर जाने में बहुत दिक्कत होता था, कोई मुझे ले जाते थे तब जा पाता था। लेकिन इस व्हीलचेयर के द्वारा अपने घर में एक कमरे से दूसरे कमरे में आ जा सकता हूं। इसका कंफर्टेबल और छोटा साइज होने के कारण यह कहीं भी आसानी से चला जाता है। अब मैं कुछ हदतक किसी के भरोसे नहीं रहा। इस इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर के जरिए मैं कहीं भी आ जा सकता हूं।





बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

चॉइस सेंटर का उद्घाटन

आज मेरे चॉइस सेंटर लोक सेवा केंद्र का उद्घाटन किया. अपने पहले वाले  घर से चॉइस सेंटर का कम सुरु किया था जिसे आज अपने नए घर के करण वहां को छोड़ना पड़ा , और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए अपने ही घर के थोड़ी दूर में एक शॉप रेंट (किराये) पर ले कर सुरु किया. कल तक अपने घर भर ही कार्य आरंभ किया था लेकिन अब अपने 5 साल के वर्क को कमर्शियल एरिया में लाकर खोला है. अब देखना यह है कि मुझे इससे कितना फायदा होता है. हालांकि यह मेरा किराया का दुकान है परंतु धीरे से मैं खुद का है दुकान लेकर  अपने  व्यवसाय को बढ़ा लूंगा। लेकिन तब तक अभी यंही काम करना है. शॉप के उद्घाटन पर  मैं किसी ज्यादा लोगों को नहीं बुलाया था घर ही घर के लोगों के द्वारा और कुछ पास्टर जैसे पास्टर ग्वाल सर , और एफ.आर. साहू सर तथा सत्या भाई और मेरे माँ पिता जी और भाई बहन उपस्थित थे. सभी के साथ एक छोटा सा प्रार्थना किया. और अपने चॉइस सेंटर को प्रारंभ किया.

 

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

रोजगार ऋण पर प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्राप्त करते हुए

दोस्तों आज मेरे लिए बहुत ही ख़ास दिन था , मैंने सन 2016 में प्रधान मंत्री मुद्रा लोन (ऋण) के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था जो 2017 के अंतिम महीने में पास हुआ जिसे पंजाब नेशनल बैंक द्वारा दिया गया. इस लोन को प्राप्त करने से पहले एक रोजगार प्रशिक्षण करना होता है जिसे मैंने प्रशिक्षण में उपस्थित हो कर अपने व्यवसाय और बैंक से जुड़े बहुत सी जानकारी प्राप्त किया. इस प्रशिक्षण में बहुत से लोग उपस्थित हुए थे जो लोन के लिए आवेदन किये थे . सब से मेरा अनुभव अच्छा रहा और कई दोस्त बने. प्रशिक्षण के दौरान कई ट्रेनर और मोटिवेशन टीचर ने हम सभी को नयी जानकारी देने व मोटिवेट किये . आज इसका अंतिम दिन था तो सभी को एक प्रमाण पत्र प्रदान किया गया. इन्ही यादगार लम्हो की कुछ तस्वीर आप तक साझा कर रहा हूँ. 




 

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

सफलता की पहली और छोटी सीढ़ी

काफ़ी दिनों बाद आज ब्लॉग लिखने को विषय मिला. बात आगे लिखू इस से पहले एक बात कहनी है की जीवन में प्रयत्न करते रहो चाहे मंजिल मिले न मिले और साथ ही खुद अपने पर भरोसा रख कर कोई काम करो तब सफलता मिलने का उम्मीद ज्यादा होती है . जैसा की दोस्तों मेरे पास नौकरी नहीं फिर भी कुछ न कुछ कर के मैं आगे बढ़ रहा हूँ .इसमें केवल मेरा इच्छा शक्ति ही है जो मुझे आगे ले जा रहा है. जीने की चाह हो या फिर कुछ बनने की होसला, सभी बाते मेरे इच्छा पर निर्भर करता है. कुछ दिन पहले मैं अपने व्यवसाय को बढ़ाने के उद्देश्य से एक चॉइस सेंटर जो की "डिजिटल सेवा केंद्र" होता है उस के मध्य से पैसा कमाना चाहता था .लेकिन इसके लिए लाइसेंस लेना पड़ता है .जो की इसी लाइसेंस को पाने के लिए मैंने अपने कोरबा जिला पंचायत से आवेदन लगाया .किन्तु उनसे मुझे कुछ भी फ़ायदा नही हूँ . तीन महीने से घुमाया जा रहा था .अंत में हतास होने लगा तो मैंने खुद ही डिजिटल सेवा के लिए ऑनलाइन आवेदन लगाया और देखो दो महीने में ही मेरी कोशिस रंग लाई. और अभी कुछ दिन हुए हैं मुझे इस कार्य के लिए आईडी मिल गया. अब नौकरी न भी मिले तो भी इसी को आगे बढ़ा कर अपना लक्ष्य हालिस करूँगा . देखना ये है की ये कहा तक सफलता को लाता है . अब अपने क्षेत्र में एक दुकान ले कर एक चॉइस सेंटर को खोलना चाहता हूँ . बस यही मेरे जीवन में एक नया बात था जिसे ब्लॉग के जरिये आपसे शेयर किया .... --शब्बीर चौरसिया

रविवार, 13 नवंबर 2016

लोगो द्वारा मुझसे पूछे जाने वाला सावल

सवाल जवाब एक ऐसा शब्द वाक्य है जो इंसान के हर वार्ता को आरंभ करता है, और इसी से एक दुसरे से हम अपना संपर्क बनाये रहते है . लेकिन मेरे  साथ जो भी पहली मुलाकात में मिलता है तो उनके मन में मुझसे जुड़े विभन्न सवाल उनके मन में उत्पन्न हो जाते है। जो कुछ लोग पूछने की हिम्मत कर के पूछ लेते हैं तो कुछ लोग नहीं पूछते . उन्ही सवालो का आज मैं अपने ब्लॉग के जरिये उत्तर देना चाहता हूँ . मेरे से पूछे जाने वाले सवाल -
  • आपका नाम मुस्लिम जैसा क्यों है क्या आप मुस्लिम हो?
उत्तर = दोस्तों मैं मुस्लिम नहीं .मुझ मे भी हिन्दू धर्म का लेबल लगा है .


मेरे नाम का शब्द "शब्बीर" है और मेरे सर नेम "चौरसिया" है जिसके कारण लोग तुरंत कंफुज़ हो जाते है की मुस्लिम जैसा नाम और सर नेम चौरसिया जो हिन्दू है . इसका कारण यह है की मेरे माता पिता को शादी के  5 वर्षो बाद तक एक भी संतान नहीं था जिसके कारण वे बहुत हताश थे, और वे लोग कई तरह के कर्मकांड और अध्यात्म के चक्कर में फसे थे. कई देवी देवता की पूजा पाठ एवं विभन्न धर्मो के इश्वरो से मन्नत मांगते थे .डॉक्टर से भी कई इलाज हुए . फिर मेरे पिता को किसी ने कहा की आप मुहर्रम में ताजिया बनवा कर मन्नत मांगो तो आपकी संतान प्राप्ति होगी. जैसा की मेरे पिता जी ने मुस्लिम दरगाह में हर शुक्रवार को लोभान जलाते और मन्नत मांगे की संतान प्राप्ति पर मैं ताजिया बनवाऊंगा . और जैसा की एक वर्ष के अन्दर में ही मेरे माँ पिता के किस्मत में मैं आया .और इस ख़ुशी के कारण ही मेरे पिता जी ने मेरा नाम "शब्बीर" रखा है जो एक मुस्लिम नाम है।
  •  आपकी शारीरिक विकाश कम क्यों है अर्थात आपकी उचाई कम कैसे है?  





उत्तर = इस सवाल का जवाब ये है दोस्तों की मेरे जन्म के वक्त मैं भी नोर्मल (सामान्य) बच्चे की तरह पैदा हुआ था (बचपन की तस्वीर देखे) परन्तु जैसे ही पैदा हुआ उसी वक्त मुझे निमोनिया हो गया जिस से मुझे गर्म हीटर वाले बक्से में रखा गया था, फिर इसके बाद मुझे आये दिन कई बार निमोनिया हुआ जिसके कारण मेरे हड्डियों के अन्दर का मज्जा को नुकसान पंहुचा .जब मेरा उम्र 3 वर्ष का हुआ फिर मेरे हाथ पाँव की हडियाँ हलकी सी ठोकर से टूटने लगा .इसके मुझे दिल्ली के सबसे बड़े हॉस्पिटल में इलाज के लिए भेजा गया जहा डॉक्टर ने कहा की इनके हडियाँ कमजोर होने के कारण टूट जाता है  इस कारण इसे सम्हाल के रखो और इनका शारीरिक विकाश नहीं हो पायेगा . इस वजह से आज मेरा शरीर एक नये रूप में आया है. न ही मैं बौना प्रजाति से हूँ..

दूसरी बात मैं अपना सारा काम स्वयं करता हूँ मुझे किसी की आवश्यकता नहीं .नहाना धोना इत्यादि सभी काम मैं स्वयं करता  हूँ. कपडे बदलने से ले कर सारा काम.


  •  आप खाना कितना खाते हो?  

उत्तर = दोस्तों मैं भी एक सामान्य इन्सान हूँ, और एक नार्मल खाना ही खाता हूँ . मेरे को कोई बीमारी नहीं न किसी चीज का परहेज है. और जितना शरीर का अनुपात है  उस अनुपात में खाना खाता हूँ.

  •  आप इतना पढ़े लिखो हो तो अभी तक नौकरी क्यों नहीं मिली आप को तो विकलांगता का आरक्षण  मिला होगा ?  
उत्तर = दोस्तो पढ़ा लिखा तो खूब हूँ और ये भी सही है की आरक्षण  मिला है फिर क्यों..? क्योकि आज के समय में नौकरी के लिए सबसे पहले प्राथमिक परीक्षा होता है जिसके बाद ही आपका आरक्षण में छुट मिलता है. और मैं आज तक परीक्षा में सफल नहीं हो पाया तो नौकरी कहाँ से मिलेगा .

तो इस तरह से मुझसे मिले वाले लोगो का पहला सवाल होता है , मैंने आज अपने ब्लॉग के माध्यम से देने की कोशिश किया है . चाहो तो आप मुझसे और भी सवाल पूछ सकते हो. 

---शब्बीर चौरसिया

बुधवार, 27 जुलाई 2016

जीवन का पहला लक्ष्य मैंने हासिल किया।

आज की सुबह मेरे लिए ख़ुशी लेकर आया। मैं अपने कॉलेज की दूसरी डिग्री हासिल किया। जो की एम्.ए. समाजशास्त्र (M.A. Sociology)की डिग्री थी। मेरे पास अब दो मास्टर डिग्री हो चूका। एम्.ए. अर्थशास्त्र (M.A. Economic) और एम्.ए. समाजशास्त्र (M.A. Sociology)। मेरा सपना था जो मैने साकार किया। अपनी शारीरिक हालात से नहीं सोचा था कि इतना पढ़ पाउँगा। लेकिन मैंने हार नही माना। चाहे जैसा भी परिस्थिति हो मैं पढ़ा। इन सबका श्रेय मेरे माता पिता का है जो मुझे पढ़ाया लिखा जिसके दम पे आज मैं अपने हालात से बढ़कर इज्जत मान सम्मान को लोगो के बीच हासिल किया। सबसे ज्यादा मेरे पिता श्री को श्रेय जाता है जो मुझे पूरी पढाई में गोदी में उठा के स्कूल से लेकर कॉलेज तक बैठाता था। मैंने पढाई इसलिए नही किया कि मेरा जॉब लगे। मेरा उद्देश्य था कि लोग मेरे ज्ञान से मेरी इज्जत करे । सो अब साकार हुआ। अब आगे पढ़ने का इरादा तो नही पर मन होगा तो P.hD करूँगा। 

शुक्रवार, 3 जून 2016

माँ बाप के बाद पैसा ही मेरा साथी

कहते है पैसा ही सब कुछ नहीं होता पर मेरे जीवन के लिए पैसा ही सब कुछ है। और मेरे लिए ही नहीं वे तमाम मेरे जैसे लोगो के लिए भी जिनका  सहारा पैसे से ही संभव है। क्योकि दुनिया में कोई रिश्ते नाते नही जो जीवन भर किसी का साथ निभा दे ओ भी बिना स्वार्थ के। आज के समय में कितना भी किसी से प्यार कर लो यदि आपके पास पैसा नही या आप कोई काम नही करते तो वे आपको बोझ समझने लगेगा। 

मैं भी अपने जीवन के आने वाले समय को सोचता हूँ तो मेरा कोई सहारा नजर नहीं आता। जब तक माँ बाप है तब तक मेरा सेवा वे बिना स्वार्थ के करेंगे क्योकि जो जन्म दिया है वही दुनिया में बिना स्वार्थ के साथ निभा सकता है,बाकी न भाई बहन साथ देगा न बीवी बच्चे, सब को आप के जीवन से कुछ न कुछ मतलब रहेगा। 

इसलिए मैं अपने दम पे जिन चाहता हूँ ताकि किसी पे बोझ न रहूँ। और तमन्ना है की इतना अमीर इंसान बनु के सब मेरे कदमो के नीचे मेरे सेवा करने को तैयार रहे। पर क्या जाने भविष्य में मेरा क्या होगा? 😢

बुधवार, 1 जून 2016

कौन बनेगा जीवन का सहारा

कभी कभी मैं सोचता हैं कौन बनेगा मेरा जीवन का सहारा? मैंने अपनी हालात से ये नहीं सोचा था की जीवन के इतने लम्बे सफ़र पार कर पाउँगा। आज मेरा उम्र और शरीर की तुलना करू तो शरीर से ज्यादा मैं जिन्दा रह चूका हूँ। और पता नहीं ये कितने दिन तक और सांस चलेगा। इसलिए आनेवाले कल के लिए मुझे चिंता होती है की माँ पापा के बाद क्या होगा। 

माँ बोलती है शादी कर लो पर ओ क्या जाने की अच्छे-अच्छो का बीवी साथ नहीं देता तो मेरे जैसे को कौन पूछे। माना की दुनिया में लड़की की कमी नहीं यदि शादी करना चाहू तो,पर क्या मतलब ऐसा प्यार का जो केवल मतलब के लिए मुझसे मज़बूरी में शादी करे।इस लिए मैं इसमें ध्यान नहीं देता। 

फिर सोचता हूँ कोई अनाथ बच्चे को गोद ले लूँ क्योकि फैमिली के बच्चे गोद लेने से क्या फ़ायदा जब खुद का बच्चा साथ नहीं देता तो फैमिली के बच्चे  क्या देगा, इसलिए अनाथ को गोद लेना चाहता हैं। पर समझ नहीं आता की किस उम्र के बच्चे को गोद लूँ यदि छोटे बच्चे को लूंगा तो उसे बड़ा करते करते मैं खुद मर चूका हूँगा तो ओ क्या साथ देगा? यदि 15 साल के बच्चे को गोद लूँ तो क्या पता उसका नियत ठीक रहेगा की नहीं। बस इसी दुविधा में अभी जी रहा हूँ। 

क्या होगा मेरा और कौन करेगा सेवा?

मंगलवार, 8 दिसंबर 2015

मेरे बारे में चंद शब्दों में

  • नाम - शब्बीर कुमार चौरसिया 
  • जन्म - 08 जनवरी 1985
  • पिता - सावंत राम चौरसिया 
  • स्थान - बालको नगर , कोरबा छत्तीसगढ़ , इंडिया 
  • योग्यता - B.com, M.A. (Economic), M.A. (Sociology), Computer PGDCA,
  • व्यवसाय - स्वयं का कंप्यूटर डाटा वर्क बिजनेस .
  •  शौख (Hobby) - चित्रकारी, लेखन, कविता, शायरी,
  •  पुरस्कार - चित्रकारी में विभिन्न प्रमाण पात्र .






दोस्तों मैं बचपन से हड्डियो में कमजोर होने से विकलांग हूँ. जिसकी वजह से मैं बचपन से २४ साल तक शारीरिक दुःख झेला है .और इसी हालत में भी मैं जीवन का संघर्ष करते अपनी शैक्षणिक योग्यता को पूरा किया . मैं अपने को कभी कमजोर नहीं समझा मैं हमेसा अपने को आम इंसानों की तरह देख है. मुझे हमदर्दी पसंद नहीं. न मैं किसी से मदद लेना चाहता हूँ. इसलिए मैं अपनी बाकी का जीवन अपने पैसो से जी सकू इसलिए मैं एक नौकरी की तलाश में हूँ. पर अब तक मुझे अपनी मंजिल नहीं मिला है .परन्तु मैं नौकरी के भरोसे नहीं हूँ .मैं अपने घर पर ही 2013से कंप्यूटर डाटा  वर्क के जरिये अपना पैसा कमा कर अपना स्याम का खर्च मैं निकल लेता हूँ. 

मैं अपना खाली समय नेट में कुछ सर्च कर के या  किताब पढ़ के निकलता हूँ. न्यूज़ पढना मुझे बहोत पसंद है .मुझे अकेले रहना बहोत पसंद है .खास कर एकांत में .और कही घुमने  का मन हो तो बस नदी पर्वत या जंगल में जाने का मन होता है .

दोस्तों मैं बहुत खुले विचार का इन्सान हूँ . जो दिल में होता है मैं बोल देता हूँ. किसी से मुझे शिकायत होने पर भी मैं उनको कुछ दिनों के बाद माफ़ भी कर देता हूँ. अध्यात्मिक नजर से मैं नास्तिक का जीवन जीता हूँ. क्योकि मैं अध्यात्म के वजह से बहोत बेवकूफी किया है .इसलिए अब धर्म और इश्वर से मेरा दिल उभ चूका है. मैं रुनिवादी और अन्धविश्वास से नफरत करता हूँ. साथ में धर्म के नाम पर कट्टरता को मैं घृणा के नजर से देखता हूँ. 

यदि मेरे हाथ में पैसा हो तो मुझे उसे खर्च करने का मन होता है. पर उसी चीज में जिसमे मुझे ज्यादा खुसी हो. खाने पिने का मैं सौकीन नहीं ,मुझे इलेक्ट्रोनिक चीजे खरीदने का बड़ा सौकीन हूँ. इसलिए मैं अपना पैसा अपने लिए खर्च करता हूँ. धन का संचय भी करता हूँ पर  उतना भी नहीं की मेरी खुसी के बिच दिवार बने .

मुझे नए लोगो से मिलना बहोत पसंद है .और उनसे बाते करना . लडकियो से भी दोस्ती करना पसंद है . और मेरा दिल में जो फिलिंग होता है मैं कह देता  हूँ. मुझे अपने इज्जत और मान-सम्मान को लेकर कोई डर नहीं .मुझे जो अच्छा लगे वही करता हूँ. पाप पुन्य सब मुझे बकवास लगता है .

मेरे जीवन में कई लड़कियां आई है और प्यार मोहब्बत का खेल चला है. पर मैं 2 लडकियो से प्यार किया . पहली वाली से तो मुझे प्यार में बहुत दुःख मिला , पर जब दूसरी आई तो मुझे दुनिया की हर खुसी दी. हाला की मैं उन दोनों के काबिल नहीं था इसलिए उनसे मेरा सम्बन्ध चंद पल का रहा है . 

मेरा कोई दोस्त है तो मेरा केवल भाई है .जिसे हर बात शेयर किया करता हूँ. आने वाले समय में ओ चाहे मेरे साथ जैसा करे पर उम्मीद है वही है मेरा ख्याल रखेगा .

मेरी माँ दुनिया की सबसेअच्छी माँ है जो मेरी इतना सेवा किया .और पिता जी जो मेरा हर ख्वाब पूरा किया. और लास्ट में मेरी बहन जो मेरा हर बात मानती है उसे बहोत प्यार है .बस कहने को मेरे पास बहोत है पर इतना ही कहना चाहूँगा .

--शब्बीर चौरसिया



शनिवार, 7 नवंबर 2015

भविष्य को लेकर चिंता

इन दिनों मुझे अपने भविष्य को लेकर काफी चिंता है। इसका वजह सिर्फ मेरे रोजगार को लेकर है। डिग्रीयाँ होने को तो मेरे पास बहोत है। और अपना खुद का छोटा बिज़नेस से अपनी खर्च और जरुरत की चीजे मैं स्वयं पूरा कर लेता हूँ। पर इन्ही चीजो से आनेवाला भविष्य के लंबी सफ़र को जीया नही जा सकता। माना की मेरे भाई के पास अच्छी नौकरी भी है और जाहिर है उनके रहते मुझे क्या गम, फिर भी मैं खुद्दार की जिन्दगीं जीना चाहता हूँ ।किसी के भरोसे नही रहना चाहता। पर न जाने कब मुझे मेरी मंजिल मिलेगा। जॉब के लिए इतने आवेदन और exam दिला-दिला के भी थक चूका हूँ। पर कोई राह नही मिल रहा। हाला की जॉब ही सबकुछ नही होता और भी रास्ते हैं income के। पर समझ नहीं आता की ऐसा क्या बिज़नेस करू जो मेरे भविष्य को सुरक्षित बना सके।

शुक्रवार, 29 मई 2015

मेरे ब्लॉग का पहला लेख

दोस्तों सबसे पहले मेरे ब्लॉग परमैं शब्बीर चौरसिया आपका तहे दिल से स्वागत करता हूँ. की आप लोग मेरे जीवन के बारे मे जानने की इच्छा रखते है और इसे पढ़ने को अपना बहुमूल्य समय दे रहे हैं.

दोस्तों मेरे जीवन यू तो बहुत ही दुःख भरा है फिर भी ईश्वर येशु ने मुझे एक साधारण इंसानो से भी बढ़कर सब कुछ दिया है। मैंने अपने जीवन में ओ सब कुछ पाया है जो एक साधारण इंसान सायद पा सकेगा। मेरी हालात तो आप जब मुझे मिलेंगे तो ही जान पाएंगे की कैसा हूँ। मैं अपने को कुछ भी नहीं समझता पर खुदा ने मुझे सभी लागो की तरह हर ख़ुशी दिया है। आज मैं जैसा भी हूँ अपने आप से खुश हूँ। और इस मुकाम तक पहुँच चूका हूँ की आज मैं आप लोगो से अपनी बाते शेयर करने को लिख रहा हूँ। मेरा शैक्षणिक शिक्षा B.com, MA Economic, MA Sociology, Computer PGDCA की है। बस एक नौकरी की कमी है फिर भी मैं अपने स्वयं के कामो से इतना पैसा कमा लेता हूँ की अपनी खर्च मैं खुद उठा सकता हूँ। दोस्तों मेरे जीवन में और भी बहुत से बाते है जिसे आप लोगो तक पहुचाने को यह ब्लॉग तैयार किया हूँ। कृपया मेरे लेख जरूर पढ़ते रहना। 
                                  धन्यवाद 
--शब्बीर चौरसिया

शुक्रवार, 25 मई 2012

इंतिजार है मुझे


न जाने जिंदगी कहाँ ले कर जाएगी  !
जाने कब मंजिल करीब आएगी !!
भटकता रहा हूँ मैं इस जीवन के उद्देश्य को समझने में !
क्यों जन्म हुआ है मेरा ये तो वक्त ही बताएगी !!



कहते हैं जीवन एक पहिये की तरह है ,जो की निरंतर चलती रहती है .जब तक की मंजिल को पा न ले  .पर न जाने क्यों मुझे पिछले कुछ सालो से ऐसा लग रहा है, की मेरी जीवन की कहानी मानो रुक सी गई है .जमाना कहा से कहा पहुँच रहा हैं और मैं अभी भी चार दीवारी में फंसा हुआ हूँ .मैं पिछले कई सालो से अंतरात्मा के बोझ से दबा हुआ हूँ मुझे अपनी जीवन की मंजिल नजर नहीं आती .मेरे जीवन में तो बचपन से ही दुखो का सिलसिला है पर बीते हुए वर्षों से मुझे कुछ ज्यादा ही आत्मिक दर्द मिल रहा है .पर फिर भी मैं अपने को टूटने नहीं दे रहा हूँ .जिंदगी को देख रहा हूँ की और कितना गम देगी . मैं भी देखना चाहता हूँ की कितने गम सहने की मुझमे सामर्थ है .पर उम्मीद करता हूँ मेरे भी जीवन में कोई तो जरुर उद्देश्य होगा जिनके लिए मैं जन्मा हूँ .और उसी की इंतिजार है मुझे .